रांची : झारखंड मैँ मनरेगा में 50 फीसदी कामों में अब महिलाओं की हिस्सेदारी तय करने की तैयारी है. ग्रामीण विकास विभाग (मनरेगा) के सचिव मनीष रंजन ने इस संबंध में सभी बीडीओ को निर्देश जारी कर दिये हैं.
मनरेगा में केवल महिला मेट से ही काम लिये जाने को भी कहा जा चुका है. जितनी भी स्कीम है, उसमें केवल महिला मेट को निबंधित किया जाना है. फिलहाल राज्य में 24 जिलों में 62903 महिला मेट कार्यरत हैं जबकि 35921 पुरुष मेट.
महिलाओं की कुल भागीदारी 63.7 फीसदी है. अब प्रयास शत प्रतिशत पदों पर महिला मेट को ही लगाये जाने पर काम होगा.
किस जिले में कितनी महिला मेट
महिला मेट का काम मुख्यतः मनरेगा योजनाओं में लेखा जोखा रिकॉर्ड मेंटेन करने का होता है. मस्टर रोल (एमआर) में रजिस्ट्रेशन वगैरह की इंट्री वगैरह करना भी इसमें शामिल है.
इन्हें तकरीबन 280 रुपये मजदूरी प्रतिदिन के हिसाब से मिलती है. राज्य में सबसे अधिक मेट की संख्या हजारीबाग में (5685) है.
इसके बाद पश्चिमी सिंहभूम (5022), गिरिडीह (4561), पूर्वी सिंहभूम (4026), दुमका (3839), पलामू (3793), गढ़वा (3749), रांची (3601), सरायकेला खरसावां (3452), जामताड़ा (2455), पाकुड़ (2266), साहेबंगज (2230) जैसे जिले शामिल हैं. सबसे कम लोहरदगा (990) औऱ रामगढ़ (987) में है.
7 दिनों में अधूरी योजनाओं को पूरा करने का टारगेट
मनीष रंजन ने राज्य के विभिन्न जिलों में मनरेगा योजनाओं की सुस्त गति पर नाराजगी जतायी है. सभी डीडीसी और बीडीओ से कहा है कि कोरोना काल में गांवों में मनरेगा के तहत योजनाएं संचालित कर ग्रामीणों को अपने गांव में ही रोजगार उपलब्ध करायें.
मनरेगा के तहत प्रत्येक गांव में पांच-छह योजनाएं संचालित कर रोजगार सृजन करें. सभी लंबित योजनाओं को एक सप्ताह के अंदर पूरा कर लेना है. श्रमिकों को ससमय मजदूरी का भुगतान हो.
रिजेक्टेड ट्रांजैक्शन, पीएफएमएस के द्वारा मनरेगा श्रमिकों के रिजेक्टेड खाता में अविलंब सुधार किया जाये. शत प्रतिशत योजनाओं का जिओ टेंगिंग भी जरूरी है. मनरेगा से बन रहे योजनाओं का स्थल निरीक्षण रेगुलर हो.
(साभार : न्यूज विंग )


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