Monday, October 4, 2010

अनियमित जीवन यापन से बढ़ रही है हड्डी रोग की समस्या: डॉ. एस.एस.रावत

टेबल वर्क की अधिकता ए.सी. में बैठना, ए.सी. गाड़ियों में सफर करना, अनियमित दिनचर्या, एक्सरसाइज न करना आदि के कारण शहरी युवाओं में कमरदर्द की समस्या चिंताजनक गति से बढ़ रही है। यह कथन है हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एस.एस. रावत का। 1995 में एम.एल.बी. मेडिकल कॉलेज, झांसी से एम.एस. (आर्थो) डॉ. एस.एस. रावत करीब 3 साल तक दिल्ली के प्रतिष्ठित अस्पतालों, गुरु तेगबहादुर, बत्रा और इन्द्रप्रस्थ अपोलो मंे बतौर रेजीडेंट डॉक्टर कार्य कर चुके हैं। 1998 में उन्होंने सेक्टर-10, नोएडा में रावत आर्थो क्लीनिक नाम से क्लीनिक खोला। आज इसी नाम से मयूर विहार-3, दिल्ली में भी एक क्लीनिक चला रहे हैं और भारद्वाज और कैलाश अस्पतालों मंे ‘विजिटिंग कंसल्टेंट’ के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. रावत का कहना है कि यदि मनुष्य सादगीपूर्ण और अनुशासित जीवन यापन करें तो 80 वर्ष की उम्र तक स्वस्थ और सुखी जीवन यापन कर सकता है। प्रस्तुत है डॉ. एस.एस. रावत से इन्द्रचन्द रजवार की बातचीत के मुख्य अंशः-

हड्डियों के मुख्य रोग कौन-कौन से है ?
ज्यादातर कमर का दर्द, जोड़ों का दर्द और सरवाइकल स्पांडालाइसिस हड्डियों के रोगों से संबंधित कॉमन प्राब्लम है।

ये तो हड्डियों के रोगों के कारण होने वाली परेशानियां हैं, वे रोग कौन-कौन से है, जिनके कारण ये परेशानियां होती है?
हड्डीरोगों में कुछ तो पैदाइशी होते हैं, कुछ उम्र के साथ पैदा होते हैं और कुछ अनियमित जीवन यापन के कारण होते हैं।

पैदाइशी हड्डीरोग कौन-कौन से हैं ?
हड्डियों से जुड़ी पैदाइशी विकृति जिसे ‘कंजाइटेल डिस आर्डर कहा जाता है, इनमेें क्लब फुट मुख्य बीमारी है, इसमें बच्चे पैदा होते समय पंजे टेढ़े होते हैं, पांच की जगह 6 अंगुलियां होती हैं या दो अंगुलियां आपस में जुड़ी होती हैं। क्लवफुट से संबंधित हड्डीरोगों का ऑपरेशन से उपचार किया जाता है।

उम्र के साथ पैदा होने वाले हड्डी रोग कौन से है ?
इसे ओस्टियो प्रोसेसिस कहा जाता है। शरीर में कैल्सियम की कमी के कारण ओस्टियो प्रोससिस बढ़ जाता है, इसमें हड्डियों में दर्द रहने लगता है। आमतौर पर यह 50 की उम्र में शुरू होता है। महिलाओं में 45 वर्ष के आसपास शुरू हो जाता है।

ओस्टियो प्रोसेसिस का क्या परिणाम होता है?
कैल्सियम की कमी और लगातार हड्डियों में दर्द रहने से रीढ़ की हड्डियों के पिचकने के आसार बढ़ जाते हैं। छोटी सी चोट पर हड्डियां टूट जाती हैं। कुछ लोगों का कूबड़ भी इसी कारण से निकल आता है।

इसके अलावा कौन सी बीमारी उम्र के साथ पैदा होती है ?
ओस्टो आर्थराइटिस नाम की एक और हड्डियों की बीमारी है जो उम्र बढ़ने के साथ-साथ पैदा होती है, लेकिन अब यह कम उम्र के लोगों को भी होने लगी है। मुख्यतः शहरी युवाओं की जीवन शैली में आए बदलाव, जैसे-टेबल वर्क की अधिकता, ए.सी. में बैठने, ए.सी. गाड़ियों में यात्रा करने, अनियमित दिनचर्या, एक्सरसाइज का न होना, समय पर और पौष्टिक भोजन का न होना आदि कारणों से कमर दर्द रहने लगता है जो हड्डीरोग का लक्षण है। मोटापा बढ़ने से भी ओस्टो आर्थराइटिस होता है।

सरवाइकल स्पांडालाइसिस क्या है ?
सामान्य बोलचाल की भाषा में इसे रीढ़ की हड्डी का रोग कहा जाता है। अनियमित दिनचर्या के कारण 35-40 साल की उम्र के बाद रीढ़ की हड्डियां बढ़ने लगती हैं तो सरवाइकल स्पांजलाइसिस पैदा होता है। इधर युवाओं में कमर दर्द की बीमारी-ऑस्टो आर्थराइटिस के बाद सरवाइकल स्पांडालाइसिस की समस्या सबसे अधिक बढ़ी है।

क्या संक्रमण के कारण भी हड्डी रोग पैदा होते हैं ?
संक्रमण से पैदा होने वाले हड्डी रोगों को ऑस्टो मालाइसिस कहा जाता है जो मुख्यतः टी.बी. (क्षय रोग) और वैक्टीरिया के संक्रमण से होते हैं। बच्चों मंे हड्डियों का इंफैक्शन अधिक होता है। चोट लगने पर मालिश करने से वैक्टीरिया पैदा होते हैं जो हड्डीरोग का कारण बन जाते हैं।

हड्डीरोगों के मामले में देश में कितने लोगों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध है ?
हड्डीरोगों का अलग से आकलन नहीं किया जा सकता। सभी तरह की चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति एक जैसी है, जो शहरों और महानगरों मंे पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, यहां अच्छे सरकारी और प्राइवेट हॉस्पीटल और प्रशिक्षित डॉक्टर हैं और लगभग हर एक बीमारी का उपचार है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। कहीं-कहीं तो 10-12 लाख की आबादी में 10-12 विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं हैं।

हड्डीरोगों से बचाव कैसे किया जा सकता है ?
अनुशासित और सादगीपूर्ण जीवन यापन हर तरह की बीमारी का बचाव है। यदि मनुष्य सादगीपूर्ण तरीके से रहे-पौष्टिक भोजन करे, नियमित रहकर जीवन यापन कर सकता है। जहां हड्डीरोग की बात है जिन लोगों को जोड़ों में दर्द रहता है, उन्हें ठंड से बचना चाहिए और चोट लगने पर मालिश नहीं करना चाहिए।

एक डॉक्टर होने के साथ आप अपनी सामाजिक भूमिका को किस रूप में देखते हैं ?
मैं व्यावसायिक फायदे के लिए किसी भी गरीब मरीज का इलाज करने से इंकार नहीं कर सकता। इसके अलावा मैं सेरेब्रल पाल्सी वाले मरीजों से कोई फीस नहीं लेता, निःशुल्क उपचार करता हूँ और साल में एक बार निःशुल्क चिकित्सा जांच शिविर का आयोजन करता हूं।

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